मौसम क्रिकेट ऑपरेशन सिंदूर क्रिकेट स्पोर्ट्स बॉलीवुड जॉब - एजुकेशन बिजनेस लाइफस्टाइल देश विदेश राशिफल लाइफ - साइंस आध्यात्मिक अन्य
---Advertisement---

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला पीरियड लीव पर PIL खारिज, कहा – इससे महिलाओं की नौकरी पर असर पड़ सकता है

On: March 13, 2026 9:40 AM
Follow Us:
---Advertisement---

भारत में महिलाओं के अधिकार और कार्यस्थल पर समान अवसर को लेकर एक महत्वपूर्ण कानूनी बहस के बीच सुप्रीम कोर्ट ने पीरियड लीव (Menstrual Leave) को अनिवार्य बनाने की मांग वाली जनहित याचिका (PIL) को खारिज कर दिया है। अदालत ने कहा कि अगर इसे कानून के रूप में अनिवार्य किया गया तो इससे महिलाओं के रोजगार पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।

यह फैसला पूरे देश में पीरियड लीव की नीति को लेकर चल रही बहस के बीच आया है। कई लोग इसे महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए जरूरी मानते हैं, जबकि कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि इससे महिलाओं के रोजगार के अवसर प्रभावित हो सकते हैं।

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, पीरियड लीव पर PIL खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने पीरियड लीव को अनिवार्य बनाने वाली याचिका को खारिज कर दिया।

क्या था मामला?

  • सुप्रीम कोर्ट में दायर जनहित याचिका में मांग की गई थी कि देशभर में कामकाजी
  • महिलाओं और छात्राओं को मासिक धर्म (पीरियड्स) के दौरान विशेष छुट्टी देने की राष्ट्रीय नीति बनाई जाए।
  • याचिकाकर्ता का तर्क था कि पीरियड्स के दौरान कई महिलाओं को दर्द, थकान
  • और अन्य शारीरिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे में उन्हें आराम के लिए छुट्टी मिलनी चाहिए।
  • हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया और कहा
  • कि यह मुद्दा नीति निर्माण से जुड़ा है, जिस पर सरकार और संबंधित संस्थाओं को निर्णय लेना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि अगर पीरियड लीव को कानूनन अनिवार्य कर दिया गया तो इसका उल्टा असर भी हो सकता है।

अदालत की टिप्पणी थी कि यदि कंपनियों को महिलाओं को हर महीने अतिरिक्त छुट्टी देनी पड़ेगी, तो कुछ नियोक्ता महिलाओं को नौकरी देने से बच सकते हैं।

कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसी नीति बनाने से महिलाओं को कमजोर या कम सक्षम मानने की धारणा भी मजबूत हो सकती है। इसलिए इस विषय पर व्यापक चर्चा और नीति स्तर पर निर्णय जरूरी है।

अदालत ने क्या सुझाव दिया?

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि राज्य सरकारें, संस्थान या कंपनियां स्वेच्छा से महिलाओं को पीरियड लीव देना चाहें तो यह स्वागत योग्य कदम हो सकता है।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यह मामला अदालत के बजाय सरकार के नीति निर्धारण के क्षेत्र में आता है। इसलिए इस विषय पर केंद्र सरकार और संबंधित मंत्रालय विचार कर सकते हैं।

भारत में पीरियड लीव की स्थिति

भारत में अभी तक पूरे देश के लिए पीरियड लीव का कोई राष्ट्रीय कानून नहीं है।

हालांकि कुछ जगहों पर यह सुविधा उपलब्ध है, जैसे:

  • कुछ निजी कंपनियां कर्मचारियों को पीरियड लीव देती हैं
  • कुछ विश्वविद्यालयों में छात्राओं को मासिक धर्म के दौरान छुट्टी दी जाती है
  • बिहार सरकार 1992 से महिला कर्मचारियों को विशेष मासिक धर्म अवकाश देती है

दुनिया के कई देशों जैसे जापान, दक्षिण कोरिया, स्पेन और इंडोनेशिया में भी पीरियड लीव की व्यवस्था मौजूद है।

पीरियड लीव को लेकर बहस

पीरियड लीव को लेकर समाज में दो अलग-अलग विचार सामने आते हैं।

समर्थन करने वालों का कहना

  • इससे महिलाओं के स्वास्थ्य और आराम को प्राथमिकता मिलेगी
  • कार्यस्थल पर महिलाओं के लिए बेहतर माहौल बनेगा
  • पीरियड्स से जुड़े टैबू और शर्म की भावना कम होगी

विरोध करने वालों का तर्क

  • इससे महिलाओं को नौकरी देने में भेदभाव हो सकता है
  • कंपनियों के लिए अतिरिक्त बोझ बढ़ सकता है
  • महिलाओं को कमजोर समझे जाने का खतरा हो सकता है

महिलाओं के रोजगार पर क्या असर पड़ सकता है?

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में इसी पहलू पर चिंता जताई। अदालत के अनुसार, अगर पीरियड लीव अनिवार्य कर दी जाती है तो कुछ नियोक्ता महिलाओं को भर्ती करने से बच सकते हैं, जिससे उनके रोजगार के अवसर कम हो सकते हैं।

इसलिए अदालत ने कहा कि इस विषय पर संतुलित और व्यावहारिक नीति बनाना जरूरी है।

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला भारत में पीरियड लीव को लेकर चल रही बहस को और तेज कर सकता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि पीरियड लीव का मुद्दा महत्वपूर्ण है, लेकिन इसे कानून के रूप में लागू करने से पहले इसके सामाजिक और आर्थिक प्रभावों पर गंभीर विचार करना जरूरी है।

Read More : Weight Lifting Straps 2026 Grip Strength बढ़ाने और Heavy Workout करने का Secret Tool

Read More : संसद में मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग विपक्षी सांसदों का बड़ा कदम!

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment