यूट्यूबर अरुण पंवार : मशहूर ऑटोमोबाइल यूट्यूबर अरुण पंवार (Arun Panwar) की शादी अब सिर्फ खुशी का मौका नहीं, बल्कि सोशल मीडिया पर बड़ा दहेज विवाद बन गई है। अरुण, जिनके यूट्यूब चैनल पर 24 लाख से ज्यादा सब्सक्राइबर्स हैं और इंस्टाग्राम पर 9.71 लाख फॉलोअर्स, ने अपनी शादी (2025 के अंत में) के वीडियो शेयर किए। इनमें दिखाया गया कि दुल्हन पक्ष से 71 लाख रुपये नकद और 21 तोला सोना “दान” के रूप में दिया गया। परिवार ने इसे स्पष्ट रूप से “दहेज नहीं, दान है” कहा, लेकिन नेटिजंस इसे दहेज का ही रूप मानकर भड़क गए हैं। वीडियो वायरल होने के बाद ट्रोलिंग और बहस छिड़ गई है।
कौन हैं अरुण पंवार?
अरुण पंवार गुरुग्राम के रहने वाले ऑटोमोबाइल कंटेंट क्रिएटर हैं। उन्होंने BCA किया और 2019 में यूट्यूब चैनल शुरू किया। कार रिव्यू, लग्जरी व्हीकल्स और लाइफस्टाइल वीडियोज से फेमस हुए। उनकी वाइफ तिथि डॉक्टर हैं, MBBS पूरी की है। अरुण की शादी ग्रैंड थी, जिसमें कई रस्में सोशल मीडिया पर शेयर की गईं। लेकिन विवाद लग्न और सगाई के दौरान “दान” की घोषणा से शुरू हुआ।

वीडियो में क्या दिखा? ‘दान’ की डिटेल्स
वीडियो में पुजारी या फैमिली मेंबर ने घोषणा की:
- कुल 71 लाख रुपये कैश
- 21 तोला सोना (विभिन्न जेवरात जैसे चेन, ब्रेसलेट, रिंग्स, टोकस, पायल, चूड़ियां आदि)
- दूल्हे के लिए: 5.5 तोला चेन, 4 तोला ब्रेसलेट, दो रिंग्स, पांच गोल्ड आइटम्स
- दूल्हे के पिता, चाचा, मां, बहन और भाभी के लिए भी गोल्ड जेवर
- अरुण और परिवार ने इसे “दान” या वॉलंटरी गिफ्ट बताया, न कि दहेज। लेकिन क्रिटिक्स कहते हैं
- कि नाम बदलने से कानून नहीं बदलता। दहेज निषेध अधिनियम 1961 के तहत
- शादी में कैश या वैल्यूएबल्स लेना गैरकानूनी है, चाहे नाम कुछ भी हो।
सोशल मीडिया पर क्या रिएक्शन?
- ट्रोलर्स: “ये दूल्हा बिक गया”, “बिकने के लिए बधाई”, “शादी है या बिजनेस?”, “इतना कमाते हो फिर भी दान ले रहे?”
- क्रिटिक्स: “एक डॉक्टर बहू का पिता इतना क्यों दे रहा? ये दहेज है, दान नहीं। इन्फ्लुएंसर होने के नाते जिम्मेदारी दिखाओ।”
- सपोर्टर्स: “अगर दुल्हन पक्ष खुशी से दे रहा है तो समस्या क्या? ये ट्रेडिशन है, जबरदस्ती नहीं।” वीडियो पर हजारों कमेंट्स आए, जहां लोग दहेज प्रथा को खत्म करने की बात कर रहे हैं। कई ने कानूनी एक्शन की मांग की।
दहेज vs दान: असली विवाद क्या है?
- भारत में दहेज एक सामाजिक बुराई है, जो लड़कियों के परिवार पर बोझ डालती है
- और कई केस में हिंसा या सुसाइड तक पहुंच जाती है। कानून साफ है
- कोई भी वैल्यूएबल्स शादी के बदले नहीं लिए जा सकते। लेकिन कई परिवार “दान
- “उपहार” या “ट्रेडिशन” के नाम पर इसे जस्टिफाई करते हैं। अरुण का केस इसी का उदाहरण है
- जहां अमीर, एजुकेटेड और इन्फ्लुएंसर फैमिली भी ऐसी प्रैक्टिस फॉलो कर रही है।
- क्रिटिक्स कहते हैं कि ऐसे वीडियो से युवा जेनरेशन में ये नॉर्मलाइज हो जाता है।
अरुण ने अभी तक विवाद पर कोई पब्लिक स्टेटमेंट नहीं दिया है। लेकिन उनका चैनल ऑटोमोबाइल रिव्यू से फेमस है, और ये घटना उनकी इमेज पर असर डाल सकती है।
क्या सीख मिलती है?
यह घटना दिखाती है कि दहेज प्रथा अमीर-गरीब, एजुकेटेड-अनएजुकेटेड सबमें मौजूद है। सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो वायरल होने से जागरूकता बढ़ती है, लेकिन साथ ही ट्रोलिंग भी। समाज को दहेज के खिलाफ मजबूत आवाज उठानी होगी, ताकि “दान” के नाम पर भी ये न चले। क्या आपको लगता है कि “दान” और “दहेज” में फर्क है!