शशि थरूर का बड़ा बयान : कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और तिरुवनंतपुरम सांसद शशि थरूर ने एक बार फिर पार्टी में एकता का संदेश दिया है। 29 जनवरी 2026 को पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से संसद भवन में करीब 2 घंटे की लंबी मुलाकात के बाद थरूर ने स्पष्ट किया कि उनका रुख कभी भाजपा के पक्ष में नहीं रहा, बल्कि कुछ मुद्दों पर वे सरकार या भारत के पक्ष में खड़े होते हैं। थरूर ने कहा, “मेरा स्टांस प्रो-बीजेपी नहीं है, बल्कि प्रो-गवर्नमेंट या प्रो-इंडिया है।”
यह बयान ऐसे समय आया है जब पिछले कुछ महीनों से थरूर और कांग्रेस हाईकमान के बीच मतभेद की खबरें तेज थीं। थरूर ने हाल ही में पीएम मोदी की कुछ नीतियों की तारीफ की थी, जिससे पार्टी में असंतोष फैला। साथ ही, केरल में कुछ कार्यक्रमों में उन्हें ‘दरकिनार’ करने की शिकायतें भी सामने आईं। लेकिन मुलाकात के बाद थरूर ने कहा, “सब ठीक है, हम सब एक साथ हैं और एक ही पेज पर आगे बढ़ रहे हैं।”
मुलाकात का पूरा विवरण
मुलाकात संसद भवन में खड़गे के चैंबर में हुई, जो करीब 1 घंटा 45 मिनट से 2 घंटे तक चली। थरूर ने इसे “बहुत अच्छी, रचनात्मक और सकारात्मक चर्चा” बताया। मुलाकात में थरूर ने अपनी शिकायतों का निवारण किया, जैसे:

- कोच्चि में एक कार्यक्रम में हुए व्यवहार से नाराजगी।
- केरल कांग्रेस में कुछ नेताओं द्वारा उन्हें साइडलाइन करने की कोशिशें।
- पार्टी की महत्वपूर्ण बैठकों (जैसे सोनिया गांधी के आवास पर बुलाई गई मीटिंग) से उनकी अनुपस्थिति पर उठे सवाल।
मुलाकात के बाद थरूर ने सोशल मीडिया पर तस्वीर शेयर की और लिखा: “पार्टी अध्यक्ष और लोकसभा में विपक्ष के नेता से गर्मजोशी भरी और रचनात्मक चर्चा। सब कुछ ठीक है।”
थरूर ने क्या कहा BJP और पार्टी पर?
पत्रकारों से बातचीत में थरूर ने स्पष्ट किया:
- “यह कोई नई बात नहीं है, मैं हमेशा से यही कहता आया हूं।”
- “मैं संसद में हमेशा पार्टी के साथ खड़ा रहा हूं, इसलिए चिंता करने की कोई जरूरत नहीं।”
- “मैं कांग्रेस में ही रहूंगा और कहीं नहीं जा रहा। मैं केरल में चुनाव प्रचार का हिस्सा रहूंगा
- और यूडीएफ की जीत के लिए काम करूंगा।”
- “मुझे इस तरह के बयान देने के लिए क्यों कहा जा रहा है?”
- उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मुद्दों (जैसे भारत-पाकिस्तान संबंध, पहलगाम हमले के बाद राजनयिक पहल)
- पर अपनी टिप्पणियों को दोहराया कि वे राजनीति से अलग रहकर देश की बात करना पसंद करते हैं।
- थरूर ने कहा कि पार्टी विचारधारा के विरुद्ध नहीं जाना चाहिए, लेकिन वे हमेशा पार्टी लाइन पर खड़े रहे हैं।
क्यों उठे थे मतभेद?
पिछले साल थरूर की कुछ टिप्पणियां कांग्रेस के आधिकारिक रुख से अलग थीं, जिससे पार्टी नेताओं ने उनकी मंशा पर सवाल उठाए। हाल ही में पीएम मोदी की तारीफ और केरल में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जैसे मुद्दों पर उनके स्टैंड से अफवाहें फैलीं कि थरूर पार्टी छोड़ सकते हैं। थरूर ने इन अफवाहों को खारिज करते हुए राहुल गांधी की भी तारीफ की – उन्हें “communalism के खिलाफ मजबूत आवाज” और “स्पष्ट राजनीतिक स्टैंड वाला नेता” बताया।
केरल चुनावों के लिए महत्वपूर्ण
- यह मुलाकात केरल विधानसभा चुनावों से ठीक पहले हुई है।
- कांग्रेस पिछले 10 साल से राज्य में विपक्ष में है और यूडीएफ (UDF) के साथ मिलकर सत्ता
- वापसी की कोशिश में है। थरूर जैसे लोकप्रिय और बौद्धिक नेता की एकता पार्टी के लिए बड़ा बूस्ट है।
- थरूर ने वादा किया कि वे चुनाव प्रचार में सक्रिय रहेंगे और यूडीएफ की जीत के लिए फ्रंटलाइन पर रहेंगे।
राजनीतिक प्रभाव क्या होंगे?
- कांग्रेस के लिए: यह मुलाकात पार्टी में एकता का संदेश देती है। मतभेदों को सुलझाकर हाईकमान ने दिखाया कि वे आंतरिक मुद्दों को संभाल सकते हैं।
- थरूर के लिए: अफवाहें खत्म हुईं, पार्टी में उनकी जगह मजबूत हुई। वे अब केरल में स्टार कैंपेनर बन सकते हैं।
- BJP के लिए: थरूर के “प्रो-इंडिया” स्टैंड से कुछ फायदा मिल सकता था
- लेकिन अब स्पष्ट हो गया कि वे कांग्रेस में ही हैं।
शशि थरूर का यह बयान और मुलाकात कांग्रेस के लिए राहत की खबर है।
- जहां मीडिया और सोशल मीडिया में “थरूर vs कांग्रेस” की खबरें चल रही थीं
- वहीं अब “सब एक साथ” का मैसेज है। थरूर ने साबित किया कि वे पार्टी के प्रति वफादार हैं
- और देशहित को प्राथमिकता देते हैं। केरल चुनावों में उनकी सक्रियता से कांग्रेस को मजबूती मिलेगी।
- क्या यह एकता लंबे समय तक बनी रहेगी? आने वाले दिनों में देखना होगा।