अखिलेश यादव : समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक बार फिर केंद्र की भाजपा सरकार पर जमकर निशाना साधा है। 24 जनवरी 2026 को अखिलेश ने दावा किया कि 2027 की जनगणना की अधिसूचना में जाति कॉलम (Caste Column) शामिल नहीं किया गया है। उन्होंने इसे ओबीसी, एससी-एसटी समुदायों की सही जनसंख्या छुपाने की साजिश करार दिया और कहा कि भाजपा की जाति विरोधी मानसिकता एक बार फिर उजागर हो गई है।
अखिलेश यादव का पूरा बयान
#अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर लिखा:
“जनगणना अधिसूचना जारी हो गई है, लेकिन इसमें जाति कॉलम नहीं है। भाजपा सरकार ओबीसी, दलित, आदिवासी और पिछड़े वर्गों की सही जनसंख्या जानना नहीं चाहती। जब तक जाति जनगणना नहीं होगी, तब तक आरक्षण का सही क्रियान्वयन संभव नहीं। भाजपा की जाति विरोधी नीति अब सबके सामने है। हमारी मांग है कि जाति आधारित जनगणना तुरंत कराई जाए, अन्यथा यह संविधान के प्रति विश्वासघात होगा।”

अखिलेश ने यह भी कहा कि भाजपा जाति जनगणना से डर रही है, क्योंकि इससे पता चल जाएगा कि पिछड़े वर्ग कितनी बड़ी संख्या में हैं और उनकी हिस्सेदारी कितनी कम है।
जनगणना अधिसूचना में क्या है और क्या नहीं?
सरकार द्वारा जारी नवीनतम अधिसूचना में जनगणना के लिए मुख्य रूप से निम्न बिंदुओं पर जोर दिया गया है:
- जनसंख्या
- लिंग अनुपात
- साक्षरता दर
- धर्म
- भाषा
- प्रवास
- आर्थिक स्थिति
लेकिन जाति (Caste) या सामाजिक श्रेणी (Social Category) के बारे में कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि केंद्र सरकार अभी भी सामान्य जनगणना और जाति जनगणना को अलग-अलग रखने की कोशिश कर रही है, जबकि विपक्षी दल इसे एक साथ कराने की मांग कर रहे हैं।
जाति जनगणना क्यों इतनी महत्वपूर्ण?
जाति आधारित जनगणना की मांग कई वर्षों से तेज हो रही है, खासकर उत्तर प्रदेश, बिहार और अन्य पिछड़े राज्यों में। इसके मुख्य कारण:
- आरक्षण की सही सीमा तय करना – वर्तमान में 27% OBC आरक्षण 1931 की जनगणना पर आधारित है।
- सब-कैटेगरीकरण – OBC के अंदर भी अत्यंत पिछड़े वर्गों को अलग से लाभ मिल सके।
- नीति निर्माण – शिक्षा, रोजगार, योजनाओं में पिछड़े वर्गों की वास्तविक हिस्सेदारी पता चल सके।
- राजनीतिक समीकरण – जाति आधारित आंकड़े राजनीतिक दलों की रणनीति को प्रभावित करते हैं।
- बिहार में नीतीश कुमार सरकार ने 2023 में जाति जनगणना कराई थी
- जिसके परिणामों से पता चला कि राज्य में OBC + EBC की आबादी 63% से ज्यादा है।
- अखिलेश यादव इसी तरह के आंकड़े उत्तर प्रदेश में भी चाहते हैं।
भाजपा का जवाब और राजनीतिक बहस
भाजपा नेताओं का कहना है कि जाति जनगणना सामाजिक विभाजन को बढ़ावा देगी। उनका तर्क है कि देश को विकसित भारत बनाने के लिए जाति से ऊपर उठकर काम करना चाहिए। वहीं विपक्षी दल इसे दलित-ओबीसी विरोधी रवैया बता रहे हैं।
अखिलेश यादव ने सवाल उठाया: “जब धर्म और भाषा की गिनती हो सकती है, तो जाति क्यों नहीं? क्या भाजपा पिछड़ों की संख्या जानकर डर रही है?”
उत्तर प्रदेश में राजनीतिक मायने
- उत्तर प्रदेश में OBC और दलित वोटर समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी
- के लिए सबसे बड़ा वोट बैंक हैं। अगर जाति जनगणना होती है और आंकड़े पिछड़ों के पक्ष में आए
- तो 2027 विधानसभा चुनाव में इसका बहुत बड़ा असर पड़ सकता है।
- अखिलेश यादव इसी आधार पर लगातार जाति जनगणना की मांग को तेज कर रहे हैं।
अखिलेश यादव का नवीनतम हमला केंद्र सरकार पर जाति विरोधी होने का गंभीर आरोप है। जनगणना अधिसूचना में जाति कॉलम न होने से विपक्ष को नया मुद्दा मिल गया है। आने वाले दिनों में यह बहस और तेज होने वाली है। क्या केंद्र सरकार जाति जनगणना कराएगी या नहीं, यह सवाल अब राजनीतिक गलियारों से लेकर आम जनता तक चर्चा का विषय बन चुका है।
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