संघ बजट 2026 : की तैयारियां जोरों पर हैं और इस बार विवाहित जोड़ों के लिए एक बड़ा टैक्स रिलीफ प्रस्तावित है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी 2026 (रविवार) को संसद में बजट पेश करेंगी। खबरों के अनुसार, संयुक्त कराधान (Joint Taxation) सिस्टम को वैकल्पिक रूप से लागू किया जा सकता है, जिससे पति-पत्नी एक साथ इनकम टैक्स रिटर्न फाइल कर सकेंगे। यह प्रस्ताव इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI) की सिफारिश पर आधारित है और अमेरिका, जर्मनी जैसे देशों के मॉडल से प्रेरित है। इससे मिडिल क्लास परिवारों, खासकर एकल कमाने वाले घरों को बड़ी राहत मिल सकती है।
संयुक्त कराधान क्या है और वर्तमान सिस्टम से कैसे अलग?
भारत में फिलहाल कराधान व्यक्तिगत आधार पर होता है। शादीशुदा होने के बावजूद पति-पत्नी अलग-अलग PAN से रिटर्न फाइल करते हैं, अलग-अलग छूट (exemptions), डिडक्शन और टैक्स स्लैब लागू होते हैं। अगर परिवार में सिर्फ एक सदस्य कमाता है, तो गैर-कमाने वाले की बेसिक एक्जेम्प्शन लिमिट (वर्तमान में ₹3 लाख) बेकार चली जाती है। इससे कुल टैक्स बोझ बढ़ जाता है।

संयुक्त कराधान में:
- पति-पत्नी की कुल आय को जोड़कर एक सिंगल रिटर्न फाइल किया जाएगा।
- परिवार को एक आर्थिक इकाई (economic unit) माना जाएगा।
- बेसिक एक्जेम्प्शन लिमिट दोगुनी हो सकती है (₹6 लाख या ICAI के अनुसार ₹8 लाख तक)।
- टैक्स स्लैब और सरचार्ज थ्रेशोल्ड बढ़ाए जा सकते हैं (जैसे सरचार्ज ₹50 लाख से बढ़कर ₹75 लाख या ज्यादा)।
- होम लोन इंटरेस्ट, मेडिकल इंश्योरेंस, स्टैंडर्ड डिडक्शन जैसी छूट बेहतर तरीके से इस्तेमाल हो सकेंगी।
यह सिस्टम वैकल्पिक होगा, यानी जोड़ों को चुनने की आजादी रहेगी – पुराना व्यक्तिगत सिस्टम या नया संयुक्त सिस्टम।
कितनी बचत हो सकती है? उदाहरण
- अगर एक पति ₹10 लाख कमाता है और पत्नी की कोई आय नहीं है
- तो वर्तमान में सिर्फ ₹3 लाख एक्जेम्प्ट होते हैं। संयुक्त में यह ₹6-8 लाख तक हो सकता है
- जिससे टैक्स में हजारों रुपये की बचत।
- दोनों कमाते हैं तो कुल आय पर अलग स्लैब लागू हो सकते हैं, जिससे हाई इनकम ब्रैकेट में जाने से बचा जा सकता है।
- सरचार्ज राहत: ₹50 लाख से ऊपर 10-37% सरचार्ज लगता है, संयुक्त में थ्रेशोल्ड बढ़ने से हाई इनकम परिवारों को फायदा।
- मिडिल क्लास और सिंगल-इनकम परिवारों के लिए सबसे ज्यादा लाभ, जहां गैर-कमाने वाले की छूट बेकार नहीं जाएगी।
सरकार की वजह और ICAI की सिफारिश
ICAI ने प्री-बजट में सुझाव दिया कि वर्तमान सिस्टम में अक्षमता है, क्योंकि शादी के बाद भी कोई लाभ नहीं मिलता। संयुक्त कराधान से अनुपालन आसान होगा, परिवार की वास्तविक आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखा जाएगा और अनपेड घरेलू योगदान (जैसे गृहिणी का काम) को मान्यता मिलेगी। सरकार मिडिल क्लास को राहत देने और टैक्स सिस्टम को आधुनिक बनाने की दिशा में कदम उठा रही है।
लागू होने की संभावना और प्रभाव
बजट सेशन 28 जनवरी से शुरू होकर 2 अप्रैल तक चलेगा। अगर बजट में यह ऐलान होता है, तो FY 2026-27 से प्रभावी हो सकता है। हालांकि, कुछ चुनौतियां हैं – जैसे डुअल-इनकम हाई-इनकम जोड़ों में कुल आय बढ़ने से टैक्स ज्यादा हो सकता है, इसलिए वैकल्पिक रखना जरूरी है। टैक्स इंफ्रास्ट्रक्चर (PAN, TDS) में बदलाव की जरूरत पड़ेगी।
यह बदलाव भारत के टैक्स सिस्टम में ऐतिहासिक कदम होगा, जो परिवार-केंद्रित टैक्सेशन को बढ़ावा देगा। मिडिल क्लास परिवारों के लिए बड़ी उम्मीद है। बजट 1 फरवरी को पेश होगा, तब पूरी तस्वीर साफ होगी।