सबरिमाला सोना चोरी मामला : केरल के प्रसिद्ध सबरिमाला अयप्पा मंदिर से जुड़े सोना चोरी के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ा एक्शन लिया है। 20 जनवरी 2026 को ED ने केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु में कुल 21 ठिकानों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के लिए की गई है। मुख्य आरोपी उन्नीकृष्णन पोट्टी के बेंगलुरु स्थित आवास और पूर्व ट्रावनकोर देवास्वोम बोर्ड (TDB) अध्यक्ष ए. पद्मकुमार के ठिकानों पर भी सर्च चल रही है। ED ने 9 जनवरी 2026 को ECIR दर्ज किया था, जिसके बाद यह पहली बड़ी छापेमारी है।
क्या है सबरिमाला सोना चोरी का मामला?
2019 में सबरिमाला मंदिर के श्रीकोविल (गर्भगृह) के दरवाजे, द्वारपाल मूर्तियों और अन्य आभूषणों पर गोल्ड प्लेटिंग का काम हुआ था। इस दौरान मंदिर से करीब 42.8 किलो सोना मरम्मत के लिए बाहर भेजा गया। लेकिन जांच में पता चला कि 4.54 किलो सोना (लगभग 4.5 किलो) कम लौटा। केमिकल एनालिसिस से पुष्टि हुई कि सोने में छेड़छाड़ हुई, कुछ जगहों पर कॉपर या निम्न धातु से रिप्लेस किया गया। दस्तावेजों, इन्वेंटरी लिस्ट और वेरिफिकेशन रिपोर्ट में कई असंगतियां मिलीं। आरोप है कि अधिकारियों की मिलीभगत से सोना गायब किया गया और मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए इसका इस्तेमाल हुआ।

केरल पुलिस ने FIR दर्ज की, जिसके बाद केरल हाई कोर्ट की निगरानी में स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) बनाई गई। SIT ने मुख्य पुजारी (तंत्री) कंदारारू राजीवरु समेत 11 लोगों को गिरफ्तार किया। आरोपियों में पूर्व विधायक और CPI(M) नेता ए. पद्मकुमार, एन. वासु, मुरारी बाबू जैसे नाम शामिल हैं। SIT ने अक्टूबर 2025 में उन्नीकृष्णन पोट्टी को हिरासत में लिया था।
ED की छापेमारी के मुख्य बिंदु
- स्थान: केरल (ट्रावनकोर देवास्वोम बोर्ड मुख्यालय सहित), कर्नाटक (बेंगलुरु में मुख्य आरोपी के घर), तमिलनाडु।
- संख्या: 21 लोकेशन पर सर्च, दिल्ली से ED टीम सक्रिय।
- उद्देश्य: सोने की हेराफेरी से जुड़े फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन की जांच, मंदिर के दान
- रिचुअल प्रोसीड्स की गड़बड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के लिंक ढूंढना।
- संभावित कार्रवाई: छापेमारी के बाद संपत्ति अटैचमेंट हो सकती है।
- पृष्ठभूमि: मामला 2019 से चल रहा है, लेकिन हाल में SIT और हाई कोर्ट की सक्रियता से तेज हुआ।
- ED ने केरल पुलिस FIR के आधार पर PMLA केस बनाया।
यह मामला धार्मिक भावनाओं से जुड़ा होने के कारण बेहद संवेदनशील है। सबरिमाला में लाखों श्रद्धालु आते हैं, और मंदिर की संपत्ति पर छेड़छाड़ की खबर ने पूरे देश में आक्रोश पैदा किया। हाई कोर्ट ने कई बार नाराजगी जताई कि पवित्र संपत्ति की जवाबदेही नहीं है। ED की जांच से अब मनी ट्रेल खुलने की उम्मीद है, जो बड़े घोटाले की ओर इशारा कर सकती है।
राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव
- केरल में सत्ताधारी CPI(M) से जुड़े नेताओं के नाम आने से राजनीतिक विवाद बढ़ा है।
- विपक्ष इसे सरकार की नाकामी बता रहा है। ED की यह कार्रवाई केंद्र-राज्य संबंधों पर भी असर डाल सकती है।
- जांच एजेंसियां अब दस्तावेज, बैंक ट्रांजैक्शन और संपत्ति की जांच कर रही हैं।
- अगर मनी लॉन्ड्रिंग साबित हुई तो आरोपी गंभीर सजा का सामना कर सकते हैं।
सबरिमाला सोना चोरी मामला मंदिर ट्रस्टों में पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी को उजागर करता है। ED की छापेमारी से उम्मीद है कि सच्चाई सामने आएगी और दोषियों को सजा मिलेगी। श्रद्धालुओं की भावनाओं का सम्मान करते हुए जांच पूरी होने तक इंतजार करना होगा।