भारत-यूरोपीय संघ FTA : 15 जनवरी 2026 को बड़ी खबर आई है कि भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच लंबे समय से चर्चा में चल रहा फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) अब अंतिम चरण में पहुंच गया है। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि दोनों पक्ष “बहुत करीब” हैं और 27 जनवरी 2026 को होने वाले भारत-EU समिट से पहले या उसी दिन समझौते को अंतिम रूप दिया जा सकता है। यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा व्यापार समझौता होगा, जो द्विपक्षीय व्यापार को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।
बातचीत की मौजूदा स्थिति
- कुल 24 चैप्टर्स में से 20 चैप्टर्स पूरी तरह फाइनल हो चुके हैं।
- बचे हुए 4 चैप्टर्स पर रोजाना वर्चुअल बातचीत चल रही है।
- हाल ही में वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने 8-9 जनवरी 2026 को ब्रसेल्स में EU ट्रेड कमिश्नर मारोस शेफकोविच के साथ हाई-लेवल मीटिंग की, जिससे गति मिली।
- दोनों पक्षों ने “फेयर, बैलेंस्ड और महत्वाकांक्षी” समझौते पर सहमति जताई है।

मुख्य बिंदु और संवेदनशील मुद्दे
- संवेदनशील कृषि उत्पाद (सेंसिटिव एग्री आइटम्स) को समझौते से बाहर रखा जाएगा, ताकि भारतीय किसानों और MSMEs की सुरक्षा बनी रहे।
- EU की मांग: ऑटोमोबाइल, वाइन, स्पिरिट्स, मेडिकल डिवाइसेस पर टैरिफ कटौती, मजबूत IP रूल्स।
- भारत की मांग: लेबर-इंटेंसिव गुड्स (टेक्सटाइल, गारमेंट्स, फार्मास्यूटिकल्स) पर ड्यूटी-फ्री एक्सेस, IT सेक्टर के लिए डेटा सिक्योरिटी।
- कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) जैसे मुद्दों पर भी चर्चा जारी है।
भारत के लिए फायदे
- EU भारत का सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर है (2024 में द्विपक्षीय व्यापार ~120 बिलियन यूरो)।
- समझौते से निर्यात बढ़ेगा: ऑटो, इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा, टेक्सटाइल, ज्वेलरी, मरीन प्रोडक्ट्स।
- निवेश बढ़ेगा: EU से ज्यादा FDI आएगा (नीदरलैंड, जर्मनी, फ्रांस प्रमुख निवेशक)।
- जॉब्स क्रिएशन: MSMEs और लेबर-इंटेंसिव सेक्टर को बूस्ट।
- ग्लोबल सप्लाई चेन में भारत की स्थिति मजबूत होगी, खासकर चीन और रूस पर निर्भरता कम करने के संदर्भ में।
- स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप: ट्रेड के साथ-साथ सिक्योरिटी और टेक्नोलॉजी कोऑपरेशन बढ़ेगा।
समयसीमा और अगले कदम
- 26 जनवरी 2026 तक नेगोशिएशंस खत्म करने का लक्ष्य।
- 27 जनवरी 2026 को EU के सीनियर लीडर्स न्यू दिल्ली आएंगे, जहां समिट
- के दौरान समझौते का ऐलान या हस्ताक्षर हो सकता है।
- अगर समय पर पूरा हुआ तो यह EU का अब तक का सबसे बड़ा ट्रेड डील होगा।
राजनीतिक और आर्थिक महत्व
यह समझौता भारत की “मेक इन इंडिया”, “आत्मनिर्भर भारत” और ग्लोबल ट्रेड डाइवर्सिफिकेशन की रणनीति का हिस्सा है। US के साथ ट्रेड टॉक्स के बीच यह डील भारत के लिए बैकअप और नई मार्केट्स खोलेगी। दोनों पक्षों में राजनीतिक इच्छाशक्ति मजबूत है, जिससे उम्मीद है कि जल्द ही यह ऐतिहासिक डील फाइनल हो जाएगी।
अगर आप एक्सपोर्टर, बिजनेसमैन या निवेशक हैं, तो यह समय भारत-EU ट्रेड के लिए गोल्डन पीरियड हो सकता है। लेटेस्ट अपडेट्स के लिए वाणिज्य मंत्रालय और आधिकारिक सोर्स चेक करते रहें!