सफला एकादशी 2025 : हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है और पौष मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी को सफला एकादशी कहा जाता है। इस वर्ष सफला एकादशी 2025 15 दिसंबर (सोमवार) को मनाई जाएगी। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा के साथ तुलसी पूजा का विशेष महत्व है। पुराणों के अनुसार, सफला एकादशी पर तुलसी से जुड़े उपाय करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है, नेगेटिविटी दूर होती है और सभी कार्यों में सफलता मिलती है। पौष मास में सूर्य देव और तुलसी की उपासना से स्वास्थ्य, समृद्धि और श्रीहरि की कृपा प्राप्त होती है।
सफला एकादशी 2025 की तिथि और मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि 14 दिसंबर 2025 को शाम लगभग 6:49 बजे शुरू होकर 15 दिसंबर को रात 9:19 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के नियम से व्रत और पूजा 15 दिसंबर 2025 को होगी। पारण (व्रत तोड़ने) का समय 16 दिसंबर को सुबह होगा। इस दिन सोमवार होने से व्रत का महत्व और बढ़ जाता है।

सफला एकादशी का महत्व
#सफला एकादशी का नाम ही इसके फल को दर्शाता है – सभी कार्यों में सफलता। इस व्रत से पापों का नाश होता है, रुके हुए काम पूरे होते हैं और मोक्ष प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। ब्रह्मवैवर्त और पद्म पुराण में इसका वर्णन है कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा से हजारों यज्ञों के समान पुण्य मिलता है। तुलसी माता भगवान विष्णु की प्रिय हैं, इसलिए इस दिन तुलसी पूजा से विशेष कृपा मिलती है।
तुलसी पूजा के विशेष उपाय
सफला एकादशी पर तुलसी से जुड़े ये उपाय अवश्य करें:
- तिलक उपाय: तुलसी की जड़ से सूखी मिट्टी लेकर माथे पर तिलक लगाएं। इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और पॉजिटिविटी आती है।
- दीपक जलाएं: तुलसी के पौधे के पास गौ घी का दीपक जलाएं। शाम को यह उपाय घर में सुख-शांति और समृद्धि लाता है।
- दान करें: व्रत पूरा होने पर द्वादशी को तुलसी का पौधा और चावल (दक्षिणा सहित) दान करें। यदि घर में तुलसी नहीं है, तो किसी जरूरतमंद को तुलसी का पौधा दान करें।
- अर्पण उपाय: भगवान विष्णु को 7 या 21 तुलसी दल पर हल्दी लगाकर अर्पित करें। इससे धन प्राप्ति के मार्ग खुलते हैं।
- मंत्र जाप: तुलसी के पास बैठकर “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का 108 बार जाप करें।
ये उपाय श्रीहरि को प्रसन्न करते हैं और जीवन में खुशहाली लाते हैं।
तुलसी पूजा के महत्वपूर्ण नियम (इन गलतियों से बचें)
पुराणों में तुलसी से जुड़े सख्त नियम बताए गए हैं, विशेषकर एकादशी पर:
- एकादशी पर तुलसी को जल न दें। इस दिन जल अर्पित करने से श्रीहरि नाराज हो सकते हैं।
- तुलसी की पत्तियां तोड़ते समय सावधानी बरतें: पूर्णिमा, अमावस्या, संक्रांति, दोपहर, संध्या
- रात्रि, बिना स्नान, तेल लगाकर या अशुद्ध अवस्था में न तोड़ें।
- तुलसी पत्तियां तोड़ने से पहले मंत्र पढ़ें और क्षमा मांगें।
इन नियमों का पालन न करने से व्रत का फल कम हो सकता है।
सफला एकादशी व्रत विधि
- सुबह स्नान कर भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित करें।
- पीले फूल, फल, मिठाई, तुलसी दल और धूप-दीप अर्पित करें।
- विष्णु सहस्रनाम या एकादशी व्रत कथा पढ़ें/सुनें।
- शाम को तुलसी पूजा कर आरती करें।
- फलाहार या निर्जला व्रत रखें।
सफला एकादशी की कथा (संक्षेप में)
- चंपावती नगरी के राजा महिष्मत के पुत्र लुंपक पापी थे। निर्वासित होने पर जंगल में रहते हुए
- अनजाने में सफला एकादशी का व्रत रखा। भगवान विष्णु प्रसन्न हुए और उन्हें राज्य वापस मिला।
- इस कथा से पता चलता है कि यह व्रत कष्ट दूर कर राजयोग देता है।
- सफला एकादशी पर तुलसी पूजा और व्रत से जीवन सफल और सुखमय बनता है।
- इस पावन अवसर पर इन उपायों को अपनाकर भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करें।