EVM विवाद : लोकसभा में चुनाव सुधारों पर चर्चा के दौरान EVM (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) को लेकर एक बार फिर सियासत गर्म हो गई। NDA गठबंधन के नेताओं ने विपक्ष पर “डबल स्टैंडर्ड” का आरोप लगाते हुए कटाक्ष किया – “जब आप बंगाल, हिमाचल या कर्नाटक में जीतते हैं, तो EVM बिल्कुल सही काम करती है। लेकिन महाराष्ट्र, हरियाणा या बिहार में हार जाते हैं, तो अचानक मशीन खराब हो जाती है?” JDU के राजीव रंजन सिंह (ललन सिंह) और TDP के लवु श्रीकृष्ण देवरायलु ने विपक्ष की “वोट चोरी” वाली थ्योरी को खारिज करते हुए कहा कि ये हार की नौबत में बहाने हैं। इस ब्लॉग में हम विस्तार से जानेंगे NDA to opposition on EVMs की पूरी बहस, प्रमुख बयान, ऐतिहासिक संदर्भ और क्या है #EVM की सच्चाई। अगर आप राजनीति के शौकीन हैं, तो ये SEO फ्रेंडली पोस्ट आपके लिए है – #EVM डिबेट की गहराई में उतरें!
EVM विवाद पर NDA-विपक्ष की बहस: मुख्य मुद्दा क्या?
लोकसभा में 10 दिसंबर 2025 को चुनाव सुधारों पर हुई चर्चा में EVM की विश्वसनीयता केंद्र में रही। NDA ने विपक्ष पर हाइपोक्रिसी का इल्जाम लगाया, दावा किया कि विपक्ष केवल हार के बाद ही EVM पर सवाल उठाता है। केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने कहा, “विपक्ष चुनाव आयोग की बार-बार सफाई को नजरअंदाज कर चुनावी प्रक्रिया को ‘पॉल्यूट’ करने की कोशिश कर रहा है।” TDP सांसद लवु श्रीकृष्ण देवरायलु ने जोड़ा, “भारतीय वोटर परिपक्व हैं, वे लोकतंत्र समझते हैं। विपक्ष सुधार सुझाने के बजाय EC पर प्रभाव का इल्जाम लगाता है।”

विपक्ष, खासकर कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी के बयानों को निशाना बनाते हुए NDA ने कहा कि “वोट चोरी” जैसे दावे बिना सबूत के हैं। ये बहस 2024-25 के विधानसभा चुनावों के बाद तेज हुई, जहां NDA ने कई राज्यों में जीत हासिल की। EVM को लेकर विपक्ष की मांग – वीवीपैट (वोटर वेरिफायबल पेपर ऑडिट ट्रेल) की 100% क्रॉस-वेरिफिकेशन – को NDA ने “बहाने” करार दिया।
NDA नेताओं के प्रमुख बयान: विपक्ष पर सीधी चोट
NDA के नेताओं ने विपक्ष को आईना दिखाने में कोई कसर न छोड़ी।
- राजीव रंजन सिंह (ललन सिंह, JDU): “बंगाल, हिमाचल और कर्नाटक में आप जीते, तो EVM सही थी। लेकिन महाराष्ट्र, हरियाणा या बिहार में हार गए, तो मशीन फाल्ट हो गई? लोग इस डबल स्टैंडर्ड को स्वीकार नहीं करते।” उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “अगर लोग बार-बार आपको वोट नहीं देते, तो EVM फाल्ट हो जाती है।” PM मोदी का बचाव करते हुए बोले, “मोदी जी कभी स्वतंत्र संस्थाओं के काम में दखल नहीं देते।” बिहार हार पर व्यंग्य: “मोदी जी से फ्री टिप्स लो… अकेले मिलो और टिप्स लेकर आओ।” SIR (सिंबल रिजर्वेशन इश्यू) पर EC की सफाई का हवाला देते हुए कहा कि ये नियमित प्रक्रिया है।
- लवु श्रीकृष्ण देवरायलु (TDP): “विपक्ष ने तेलंगाना या कर्नाटक में कांग्रेस की जीत के समय ‘वोट चोरी’ नहीं पूछा। ये सवाल सिर्फ तब उठते हैं जब रिजल्ट आपके पक्ष में न हो।” उन्होंने मनीष तिवारी का जिक्र कर निराशा जताई, “विपक्ष सुधार सुझाने के बजाय EC पर संदेह पैदा करता है। भारतीय वोटर समझदार हैं।”
ये बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो गए, जहां NDA समर्थक विपक्ष को “हार के बहाने” बनाने वाला बता रहे हैं।
विपक्ष का पक्ष: सुधारों की मांग या साजिश?
विपक्ष ने EVM पर सवाल उठाते हुए कहा कि ये पारदर्शिता की कमी दिखाते हैं। मनीष तिवारी जैसे नेताओं ने EC पर “प्रभाव” का आरोप लगाया, लेकिन NDA ने इसे “बिना सबूत का प्रोपगैंडा” बताया। विपक्ष की मुख्य मांग: VVPAT की फुल काउंटिंग और पेपर बैलट की वापसी। हाल के चुनावों में हार के बाद ये आवाज तेज हुई – जैसे महाराष्ट्र (2024) में BJP-शिवसेना गठबंधन की जीत और बिहार (2025) में NDA की सफलता। विपक्ष का तर्क: EVM हैकिंग संभव है, जबकि NDA कहता है कि EC की जांच में कोई खामी नहीं मिली।
#EVM विवाद का ऐतिहासिक संदर्भ: एक नजर में
| राज्य/चुनाव | जीतने वाली पार्टी | EVM पर विपक्ष का रुख |
|---|---|---|
| बंगाल (2021) | TMC | कोई शिकायत नहीं |
| हिमाचल (2022) | कांग्रेस | EVM सही मानी गई |
| कर्नाटक (2023) | कांग्रेस | कोई सवाल नहीं |
| तेलंगाना (2023) | कांग्रेस | स्वीकार्य |
| महाराष्ट्र (2024) | BJP-शिवसेना | “वोट चोरी” के आरोप |
| हरियाणा (2024) | BJP | EVM फाल्ट का दावा |
| बिहार (2025) | NDA | हेरफेर की शिकायतें |
EVM की सच्चाई: फैक्ट्स क्या कहते हैं?
EVM 1980 के दशक से भारत में इस्तेमाल हो रही हैं, जो पेपर बैलट की कमियों (बूथ कैप्चरिंग, फर्जी वोटिंग) को दूर करती हैं। EC के अनुसार:
- EVM VVPAT से जुड़ी हैं, 5% रैंडम चेक होता है।
- 2019 लोकसभा चुनाव में 90 करोड़ वोट EVM से काउंट हुए, कोई बड़ी अनियमितता नहीं।
- सुप्रीम कोर्ट ने 2024 में VVPAT वेरिफिकेशन बढ़ाने का आदेश दिया, लेकिन फुल काउंटिंग खारिज की।
NDA का तर्क: विपक्ष EC की सफाई को नजरअंदाज करता है। विपक्ष: तकनीकी कमजोरियां हैं, जैसे सॉफ्टवेयर हैकिंग। एक्सपर्ट्स कहते हैं कि EVM ऑफलाइन हैं, इसलिए सुरक्षित, लेकिन पारदर्शिता बढ़ानी चाहिए।
चुनाव सुधार: आगे क्या?
ये बहस चुनाव सुधारों पर फोकस करती है – जैसे SIR प्रक्रिया, वोटर लिस्ट क्लीनअप और डिजिटल वोटिंग। NDA ने विपक्ष से “कंस्ट्रक्टिव सुझाव” मांगे, जबकि विपक्ष EC की स्वतंत्रता पर जोर दे रहा है। 2026 के राज्य चुनावों से पहले ये मुद्दा और गर्मा सकता है।
EVM डिबेट – हार का बहाना या सिस्टम की कमजोरी?
NDA to opposition EVM बहस ने लोकतंत्र की मजबूती पर सवाल उठाए। NDA का तंज सही लगता है कि विपक्ष की शिकायतें “सेलेक्टिव” हैं, लेकिन विपक्ष की मांग पारदर्शिता की है। क्या EVM सुधार जरूरी हैं? कमेंट्स में अपनी राय शेयर करें! राजनीतिक अपडेट्स के लिए बने रहें।