थाईलैंड हवाई हमला : 08 दिसंबर 2025 की सुबह दुनिया हैरान रह गई जब थाईलैंड की वायुसेना ने कंबोडिया सीमा पर विवादित इलाक़े में F-16 लड़ाकू विमानों से कई हवाई हमले किए। कंबोडिया का दावा है कि इन हमलों में उसके ५ सैनिक मारे गए और १२ घायल हुए हैं। थाईलैंड ने इसे “सीमित सैन्य कार्रवाई” बताया है जो कंबोडियाई सैनिकों द्वारा थाई क्षेत्र में घुसपैठ के जवाब में की गई। ये घटना ११वीं सदी के प्राचीन हिंदू-ख्मेर मंदिर प्राह विहार (Preah Vihear) के आसपास के ४.६ वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को लेकर सदियों पुराने सीमा विवाद को फिर से आग दे रही है।
क्या है प्राह विहार विवाद? (संक्षेप में इतिहास)
- १९०७ में फ्रांस (तत्कालीन कंबोडियाई शासक) और सियाम (थाईलैंड) ने सीमा तय की थी, लेकिन नक्शे में मंदिर कंबोडिया को दे दिया गया।
- १९६२ में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) ने मंदिर को कंबोडिया का बताया, पर आसपास का ४.६ किमी² इलाक़ा “विवादित” छोड़ दिया।
- २००८ में यूनेस्को ने प्राह विहार को विश्व धरोहर घोषित किया → कंबोडिया ने वहाँ सैन्य तैनाती बढ़ाई → थाईलैंड भड़क गया।
- २००८-२०११ के बीच दोनों देशों की सेनाओं में झड़पें हुईं, ३० से ज़्यादा लोग मारे गए।
- २०२५ तक मामला शांत था, लेकिन नवंबर २०२५ में कंबोडियाई सैनिकों ने थाई चौकियों पर कथित तौर पर गोलीबारी की → तनाव बढ़ा → और अब हवाई हमला!

८ दिसंबर २०२५ की घटना: क्या हुआ?
थाई रक्षा मंत्रालय के अनुसार:
- कंबोडियाई सैनिकों ने ७ दिसंबर को थाई क्षेत्र में ८०० मीटर अंदर घुसकर थाई सैनिकों पर AK-47 से फायरिंग की।
- थाईलैंड ने चेतावनी दी, लेकिन अगले दिन फिर हमला हुआ।
- सुबह ६:४५ बजे थाई F-16 ने विवादित क्षेत्र में ५०० पाउंड के GBU-12 लेजर गाइडेड बम गिराए।
- कंबोडिया ने इसे “युद्ध की घोषणा” बताया और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में शिकायत दर्ज कराई।
कंबोडिया का पक्ष:
- थाईलैंड ने बिना उकसावे के हमला किया।
- मारे गए सैनिक मंदिर की सुरक्षा कर रहे थे।
- प्रधानमंत्री हून मानी ने इसे “थाई आक्रामकता का नया अध्याय” कहा।
इस हमले के बड़े नतीजे क्या हो सकते हैं?
- ASEAN में बवाल – दोनों देश ASEAN के सदस्य हैं। अभी तक संगठन इस मुद्दे पर चुप्पी साधे रहा है, लेकिन अब दबाव बढ़ेगा।
- चीन का खेल – कंबोडिया चीन का करीबी है (रियाम नौसेना बेस)। अगर चीन ने समर्थन दिया तो मामला क्षेत्रीय युद्ध में बदल सकता है।
- थाईलैंड में राजनीतिक फायदा – वहाँ अभी सैन्य-समर्थित सरकार है। राष्ट्रवादी लहर चलाकर सरकार अपनी स्थिति मज़बूत करना चाहती है।
- पर्यटन को झटका – प्राह विहार मंदिर दोनों देशों का बड़ा टूरिस्ट स्पॉट है। अब सीमा बंद होने की आशंका।
भारत का नज़रिया क्यों मायने रखता है?
- भारत दोनों देशों का अच्छा दोस्त है।
- थाईलैंड के साथ भारत की रक्षा सहयोग बढ़ रहा है (ब्रह्मोस मिसाइल डील की बात चल रही)।
- कंबोडिया में भारतीय कंपनियाँ तेल-गैस क्षेत्र में निवेश कर रही हैं।
- भारत हमेशा शांतिपूर्ण समाधान की वकालत करता रहा है। विदेश मंत्रालय ने अभी तक सिर्फ “संयम बरतने” की अपील की है।
आगे क्या होगा?
- ICJ ने २०१३ में कहा था कि विवादित ४.६ किमी² क्षेत्र में दोनों देश सैनिक न रखें। लेकिन कोई मान नहीं रहा।
- कंबोडिया जवाबी कार्रवाई की धमकी दे रहा है।
- थाईलैंड ने अपनी सीमा पर T-50 गोल्डेन ईगल जेट और आर्टिलरी तैनात कर दी है।
- संयुक्त राष्ट्र में आपात बैठक बुलाई जा सकती है।
१००० साल पुराना मंदिर फिर खून माँग रहा है!
प्राह विहार कोई साधारण मंदिर नहीं – ये हिंदू देवता शिव को समर्पित ११वीं सदी का ख्मेर कला का नायाब नमूना है। लेकिन पिछले ११८ साल से ये दोनों देशों के अहंकार का शिकार बना हुआ है। जब तक दोनों देश ICJ के फैसले को पूरी तरह नहीं मानेंगे, ये खून की होली चलती रहेगी।